Latest News : श्री साई बाबा की 23वीं स्थापना दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम 13, 14, 15 फरवरी 2016 ।

मंदिर - संक्षिप्त परिचय

मैं साई मन्दिर के पीछे एक प्लाट देखने आया था, वह सन् 1987 की बात है मैं प्लाट देखकर वापस आया, तो बीच रास्ते में एक कोयले की टाल थी, कपूर साहब चलाते थे, कपूर साहब मुझसे बोले यहाँ क्या करने आये हो तब मैने प्लाट की तरफ देखकर कहा कि वह प्लाट लेने के लिए आया हूँ उन्होनें मुझसे कहा, इस प्लाट का रास्ता इधर से नही है प्लाट का रास्ता पीछे से है मैने उनकी बात सुनी और मैने कहा ठीक है। बाहर आकर मै एक कुँऐ परपेड़ के नीचे खड़ा हो गया गर्मी के मारे बेहाल था उस वक्त मेरी नजर शंकर जी के मन्दिर पर पड़ी शंकर जी को प्रणाम करते हुए मन ही मन मैने कहा ‘‘हे भोलेनाथ मुझे यह सामने वाला मकान दिला दो तो मैं अपने साई बाबा का मन्दिर आपके प्रांगण में बनवांऊगा‘‘ यह बात कह कर मै वापस आग या।

लगभग दो माह ही बीता होगा कि मेरे एक मित्र मुन्ना ठाकुर मेरे पास आये और कहने लगे कि भाई एक मकान शेखापुर बड़ा चांदगंज में आया है जिसको आप लेलो मैने कहा भाई रविवार को दिखा देना हम लोग मकान देखने गये तो मुझे अपनी आखों पर विश्वास नही हो रहा था कि वह वही मकान है जिस की मैने भोलेनाथ से प्रार्थना किथी। मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा। परन्तु मै साथ में नर्वस भी था। क्योंकि मकान की कीमत मेरे वश के बाहर थी। बात चलती रही, एक दिन सब मित्रों ने मुझे बैढाया और कहा क्या बात है जो तुम परेशान रहते हो तब मैने उन्हे सारी बातें बताई। सभी ने मुझसे कहा कि तुम मकान लेने के लिए हाँ करो सारा काम हो जायेगा। मैने जो भी पैसा था अपने मित्रों को दे दिया।

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दान अपील

मैं साई मन्दिर के पीछे एक प्लाट देखने आया था, वह सन् 1987 की बात है मैं प्लाट देखकर वापस आया, तो बीच रास्ते में एक कोयले की टाल थी, कपूरसाहबचलातेथे, कपूर साहब मुझसे बोले यहाँ क्या करने आये हो तब मैने प्लाट की तरफ देखकर कहा कि वह
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